Guru's AddaGuru's Adda

Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker) · Sarga 3

दूसरा सर्ग समाप्त तीसरा सर्ग श्रीरामचन्द्रजी की शंका के निराकरण के बहाने स्थूल आदि जगत्‌ के अध्यारोप ओर अपवाद से प्रत्यगात्मरूप विषय की सिद्धि |

18 verse-groups

  1. Verse 1इस प्रकार पूर्व वृत्तान्त का सम्पूर्णतया स्मरणकर विस्तारपूर्वक उसको कहने के लिए प्रस्तुत…
  2. Verse 2इससे संप्रदायशुद्धि कही । इस प्रकार प्रतिज्ञापूर्वक अपने उपदेशश्रवण की ओर श्रीरामचन्द्रजी…
  3. Verse 3उक्त सन्देह को ही दशति हैं। श्रीशुकदेवजी के पिता और गुरु महामति सर्वज्ञ ये व्यासजी कैसे व…
  4. Verse 4यदि कहिए कि यह सन्देह ही नहीं बन सकता है, सो नहीं कह सकते, क्योकि अत्यन्तिक दुःखविनाश से…
  5. Verse 5इससे व्यास आदि भी असंख्य उत्पन्न होते हैं, यह सूचित हुआ। जो कोटि-कोटि त्रिजगत्‌ इस समय वि…
  6. Verses 6–7परमात्मारूपी महासागर में जगत्‌सृष्टिरूपी जो तरंग होंगे, उनकी गिनती करने के लिए भी वाणी मे…
  7. Verse 8इस प्रकार अतिगूढ अभिप्राय के परिज्ञान द्वारा उसमें विशेष बात के कथन से श्रीराम द्वारा प्र…
  8. Verse 9वह किस सामग्री से ओर किस स्वरूप से युक्त होकर देखता है ? इस पर कहते हैं। आतिवाहिक (२) नाम…
  9. Verse 10शकरा - तेन प्रद्योतेनैष आत्मा निष्क्रामति चक्षुप्रो वा मूर्ध्नो वाऽन्येभ्यो वा शरीरदेशेभ्…
  10. Verses 11–13इस प्रकार जगत्‌ के वासनामय होने पर जो फलित हुआ अर्थात्‌ परमार्थ दृष्टि से उसमें भ्रमरूपता…
  11. Verse 14ऐसी परिस्थिति में भगवान्‌ वेदव्यासजी का वैधम्यच्चि न स्वप्नादिवत्‌ (जाग्रत्‌ और स्वप्न आद…
  12. Verses 15–16यही इहलोक” कहलाता हे, यह अभिप्राय हे । अव्यवस्थितस्वभाव का होने के कारण भी जगत्‌ मिथ्या ह…
  13. Verse 17इस प्रकार मिथ्यात्व के सिद्ध होने पर प्रपंच के निषेध से अवशिष्ट आत्मा की सिद्धि है, इस अभ…
  14. Verse 18मूलोच्छेद के बिना, केवल अपलापमात्रसे, उसकी निवृत्ति नहीं हो सकती, ऐसा मन में रखकर अविद्या…
  15. Verses 19–20अविद्या आदि सम्पूर्ण पदार्थो की कल्पना का अधिष्ठान कहते हैं । हे राम, अतिविस्तृत परमार्थ…
  16. Verse 21प्रस्तुत शंका के समाधान के उपोद्घात (भ्रूमिका) रूप से जगत्‌ की व्यवस्था और प्रस्तुत शास्त…
  17. Verses 22–24उन बत्तीसों में भी आवान्तर भेद कहते हैं। उन अनेक तरंगों से ब्रह्मविद्‌, ब्रह्मविद्वर, ब्र…
  18. Verses 25–36आठ बार उत्पन्न होकर महाभारतनामक इतिहास का प्रचार, वेदविभाग, कुलप्रथा का पालन और ब्रह्मा क…