Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 3, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 3, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
न पृम्ब्यादिमहाभूतगणा न च जगत्क्रमाः ।
मृतानां सन्ति तत्रापि तथाप्येषां जगद्भमाः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार मिथ्यात्व के सिद्ध होने पर प्रपंच के निषेध से अवशिष्ट आत्मा की सिद्धि है,
इस अभिप्राय से कहते हैं।
न पृथिवी आदि पंच महाभूत हैं, न जगत् और जगत् का क्रम (सृष्टिक्रम) ही है अर्थात्
ये सब मिथ्या है, फिर भी मृत और जीवित जीवों को इनमें जगत्-भ्रम होता है। ज्ञान के
बिना इनका उच्छेद नहीं हो सकता । इस प्रकार प्रपंच के निषेध से अवशिष्य आत्मा की
सिद्धि हुई