Guru's AddaGuru's Adda

Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 74

9 verse-groups

  1. Verses 1–2दुःसाध्य अर्थ भी जिस रीति से सिद्ध हुआ वह मुझसे कहिए । महाराज वसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामजी…
  2. Verses 3–24उसकी दान में प्रसिद्धि बतलाते हैं। चन्द्रमा की नाई प्रसन्न मुखवाले, चिन्तामणि के सदृश अभी…
  3. Verse 25यों गुरु द्वारा उपदेश ग्रहण कर चुके राजा भगीरथ विवेक से अपने-आप आत्मतत्व का हृदय में पयाल…
  4. Verse 26अभान का उपपादक जो अज्ञानांश तथा अन्य का अवभासक जो विक्षेपांश है वह नष्ट नहीं हुआ है, यह द…
  5. Verse 27राज्यादि मेँ अभिमान होने से तत्‌-तत्‌ विषयों में चित्त के बराबर दौडते रहने के कारण भगीरथ…
  6. Verse 28अमानित्व आदि में से कुछ साधनों को पृथकृकर उनका अनुवाद ओर व्याख्यान करते हैँ । विषयों मे आ…
  7. Verses 29–31“मयि वाऽनन्ययोगेन भक्तिरव्यभिचारिणी” इसका तात्पयार्थ दिखलाते है । अनन्ययोग से यानी अभेदभा…
  8. Verses 32–35तव अहंकार-परित्याग का उपाय ही पहले मुझसे कहिये, इस अभिप्राय से राजा भगीरथ पूछते हैं। भगीर…
  9. Verse 36सर्वत्याग ही अवश्य कर्तव्य है, इसलिए उसीका विस्तारपूर्वक प्रतिपादन करते हैं। हे राजन्‌, य…