Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 74, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 74, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 74 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
असक्तिरनभिष्वङ्गः पुत्रदारगृहादिषु ।
नित्यं च समचित्तत्वमिष्टानिष्टोपपत्तिषु ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
अमानित्व आदि में से कुछ साधनों को पृथकृकर उनका अनुवाद ओर व्याख्यान करते हैँ ।
विषयों मे आसक्ति का (राग का) अभाव; पुत्र, स्त्री, घर, धन आदि विषयों मेँ ममता का अभाव
तथा इष्ट या अनिष्ट वस्तुओं की प्राप्ति में निरन्तर हर्ष और विषाद का अभाव