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Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 19

अठारहवाँ सर्ग समाप्त उन्नीसवोँ सर्ग॑ ब्रह्माणी की हंसी में चण्डनामक कौए के सम्बन्ध से भाईयों के साथ अपनी (भुशुण्ड की) उत्पत्ति, उसी ब्राह्मशक्ति के प्रसाद से ज्ञान और पिता के स्थान की प्राप्ति का वर्णन ।

39 verse-groups

  1. Verse 1वायसराज भुशुण्ड ने कहा : ब्रह्मन, जब उन मातृकाओं का उत्सव चल रहा था, तब उनके उत्तम वाहनरू…
  2. Verse 2उस उत्सव में मद्यपान से उन्मत्त हुई कुछ ब्राह्मीशक्ति के रथ में जुतनेवाली हँसियाँ और "अलम…
  3. Verse 3समुद्रतट की समथल भूमि में भली प्रकार नृत्य ओर मद्यपान कर रही उन हँसियों को पुरुष-विषयक अन…
  4. Verse 4तदनन्तर उस समय उत्पन्न-रति वे सभी हँसियाँ उन्मत्त होकर क्रमशः निकृष्टजातीय भी कौए के साथ…
  5. Verse 5सात कुलर्हेसियों के वल्लभ इस चण्डनामक कोए ने क्रम से एक-एक हँसी के साथ तब तक रमण किया, जब…
  6. Verse 6रति से तृप्त हुई उन हँसियों ने गर्भधारण किया ओर वे देविर्यो उत्सव -कार्य सम्पादित हो जाने…
  7. Verse 7भोजन के लिए शूलपाणि महादेवजी को प्रिय उमा समर्पित की, जो ओदनरूपता (भात) को प्राप्त हुई थी
  8. Verses 8–9भोजन में मेरी प्रिया ही दी गई है, यों जानकर जब महादेवजी मातृकाओं के प्रति रुष्ट हुए, तब उ…
  9. Verse 10अनन्तर देवियाँ, महादेवजी और उनका परिवार - ये सब सन्तुष्टमन होकर अपनी-अपनी दिशा की ओर चल द…
  10. Verse 11हे मुनीश्वर, वे ब्राह्मीशक्ति के रथ की हँसियाँ गर्भवती हुई थीं, उन्होने ब्राह्मी देवी के…
  11. Verse 12ब्राह्मीशक्ति ने कहा : पुत्रियां, इस समय गर्भवती तुम सब मेरे रथकार्य के लिए असमर्थ हो, इस…
  12. Verse 13गर्भ से अलसाई हुई उन हँसियों को वैसा कहकर दयालु ब्राह्मी देवी ~ उनके ऊपर अनुग्रह के लिए व…
  13. Verse 14हे मुनीश्वर, गर्भधारण से अलसाई हुई वे राजहँसियाँ भगवान विष्णु के नाभिकमल के मूल में ब्रह्…
  14. Verse 15तदनन्तर उस प्रकार विचरण करती हुई उन राजहँसियों का गर्भ परिपक्व हो गया । उन्होने नाभिकमल क…
  15. Verse 16अनन्तर समय पाकर उन्होने इक्कीस अण्डे दिये ओर यथासमय भीतरी गर्भ पक जाने पर हँसियों के पग क…
  16. Verse 17हे मुने, उस प्रकार उन अण्डो के द्वारा ये हम चण्ड के पुत्र इक्कीस भाई कौए की जाति में उत्प…
  17. Verse 18उस कमल के पल्लव के ऊपर हुए वे हम क्रमशः बड़े हुए, हम लोगों को पंख आए ओर आकाश में उड़ने मे…
  18. Verse 19तुमने तत्त्व कैसे जाना ? इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए उपक्रम करते हैँ । महर्षे, हम लोगो…
  19. Verse 20अनन्तर उपयुक्त समय आने पर प्रसाद करने में तत्पर हुई भगवती ब्राह्मी ने स्वयं ही हम लोगों क…
  20. Verse 21हम लोगों का मन विलीन हो गया, इसलिए "एकान्त प्रदेश में उपद्रवशून्य होकर समाधि में ही स्थित…
  21. Verse 22वहाँ पिताजी ने हम लोगों का आलिंगन किया ओर तदनन्तर हम सबने भगवती अलम्बुसा की पूजा की । प्र…
  22. Verses 23–24पिता चण्ड ने कहा : हे पुत्र, क्या तुम लोग इस संसाररूपी जाल से, जो असीम वासनारूपी तन्तुओं…
  23. Verse 25कौओं ने कहा : हे पिताजी, ब्राह्मीदेवी के प्रसाद से हम लोगों ने ज्ञातव्य विषय का भली-भाँति…
  24. Verse 26पिता चण्ड ने कहा : हे पुत्रो, एक मेरुनामक अत्यन्त ऊँचा पर्वत हे, वह भाँति-भाँति के अनेक र…
  25. Verse 27प्रकाशमान चन्द्र और सूर्यरूपी दीपक से युक्त अनेकविध प्राणियों के कारण विस्तृत हुए कुटुम्ब…
  26. Verse 28वह पृथ्वी के द्वारा ऊपर को उठाया गया मानों एक हाथ हे । उस हाथ में किंपुरुष आदि देश ही चन्…
  27. Verses 29–30वह पर्वतों का राजा है, उसके चारों ओर हिमालय आदि सात कुलपर्वत सामन्तरूप से विराजित हैं; वह…
  28. Verses 31–34कमनीय दिशारूपी कामिनियाँ उसके चारों ओर जल की धारा युक्त शीतल अंगभूषण मेघरूप नील, श्वेत आद…
  29. Verse 35इसके पैर सोलह हजार योजन नीचे पृथ्वी में अवस्थित हैं, जिनकी नाग, असुर और बड़े-बड़े सर्प पू…
  30. Verse 36इसके पृष्ठभाग में अनेकविध प्राणियों से परिवृत एक महान कल्पवृक्ष स्थित हे, जो कि शिखररूपी…
  31. Verses 37–38उसके दक्षिण तने पर एक शाखा है, जिसमें कनक के सदृश पीले पल्लव लगे हुए हैं, रत्नों के सदुश…
  32. Verse 39हे पुत्रों, पहले जिस समय भगवती अलम्बुसादेवी ध्यान मेँ आसीन थीं, उस समय मैंने चमकीली मणियो…
  33. Verses 40–42वह (घोंसला) विचारपूर्वक व्यवहार करनेवाले कौओं के पुत्रों से व्याप्त है तथा भीतर से अत्यन्…
  34. Verse 43हे प्यारे बच्चों, देवताओं से भी दुर्गम उस सुन्दर घोंसले पर तुम लोग जाओ, वहाँ निवास किये ह…
  35. Verse 44कर, पवन-लोक प्राप्त कर हम लोगों ने व्योमचारी देवताओं को प्रणाम किया
  36. Verse 45हे मुनीश्वर, (इसके बाद हम लोग) सूर्य-मण्डल का अतिक्रमण कर स्वर्ग के अमरावती नगर में पहुँच…
  37. Verses 46–47वहाँ पहुँचकर (हम लोगों ने) तत्क्षण ही माता और भगवती ब्राह्मीदेवी को प्रणामपूर्वक पिता द्व…
  38. Verses 48–49उन्होंने स्नेहपूर्वक हम लोगों का आलिंगन किया और "जाओ" यों आज्ञा तथा आर्शीवाद देकर उत्साहि…
  39. Verse 50कहे गये वृत्तान्त का उपसंहार करते हैं। हे महानुभाव, "तुम किस कुल में उत्पन्न हुए ?' “किस…