Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verses 23–24
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, verses 23–24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 23,24
संस्कृत श्लोक
चण्ड उवाच ।
पुत्राः कच्चिदपर्यन्तवासनातन्तुगुण्ठितात् ।
भवन्तो निर्गता नूनमस्मात्संसारजालकात् ॥ २३ ॥
नो चेद्वयं भगवतीं तदिमां भृत्यवत्सलाम् ।
प्रार्थयामो यथा यूयं भवथ ज्ञानपारगाः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
पिता चण्ड ने कहा : हे पुत्र, क्या तुम लोग इस
संसाररूपी जाल से, जो असीम वासनारूपी तन्तुओं से गुँथी गयी है, मुक्त हो चुके हो ? यदि नहीं, तो
उससे छुटकारा पाने के लिए सेवकवत्सल इस भगवती अलम्बुसा की हम प्रार्थना करें, जिससे तुम सब
ज्ञान में पारंगत हो जाओगे