Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
काका ऊचुः ।
तात ज्ञातमलं ज्ञेयं ब्राह्म्या देव्याः प्रसादतः ।
किंत्वेकान्तस्थितेः स्थानमभिवाञ्छाम उत्तमम् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
कौओं ने कहा : हे पिताजी, ब्राह्मीदेवी के प्रसाद से हम लोगों ने
ज्ञातव्य विषय का भली-भाँति ज्ञान कर लिया है, किन्तु एकान्त में वास करने योग्य उत्तम स्थान की
हम लोगों को अभिलाषा है