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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

प्रसादपरया काले भगवत्या ततः स्वयम् । तथाङ्गानुगृहीता स्मो येन मुक्ता वयं स्थिताः ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

अनन्तर उपयुक्त समय आने पर प्रसाद करने में तत्पर हुई भगवती ब्राह्मी ने स्वयं ही हम लोगों के ऊपर तत्त्वसाक्षात्काररूप फल के द्वारा वैसा अनुग्रह किया, जिससे हम लोग जीवन्मुक्त होकर स्थित हैं