Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
संशान्तमनसः शान्ता एकान्ते ध्यानसंस्थितौ ।
तिष्ठाम इति निश्चित्य पितुः पार्श्वे वयं गताः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
हम लोगों का मन विलीन हो गया, इसलिए "एकान्त
प्रदेश में उपद्रवशून्य होकर समाधि में ही स्थित रहे" एेसा निश्चय करके हम लोग अपने पिताजी के पास
विन्ध्य-प्रदेश में गये