Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
रत्नपुष्पदलच्छन्नं रसायनफलान्वितम् ।
चिन्तामणिशलाकाभिर्विहितालिन्दसंस्थिति ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे पुत्रों, पहले जिस समय भगवती
अलम्बुसादेवी ध्यान मेँ आसीन थीं, उस समय मैंने चमकीली मणियों से जड़ा हुआ उस शाखा के ऊपर
एक घोंसला बनाया ओर उसमें विलास किया ॥ ३ ८॥ वह घोंसला रत्नसदृश चमकी ले पुष्पों की पँखुडियों
से ढँका हुआ है, अमृत के समान स्वादु फलों से परिपूर्णं है ओर चिन्तामणि की शलाकाओं से उसके
बाहरी दरवाजों की रचना की गई है