Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verses 37–38
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, verses 37–38 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
तस्यास्ति दक्षिणस्कन्धे शाखा कनकपल्लवा ।
रत्नस्तबकनीरन्ध्रा चन्द्रबिम्बोल्लसत्फला ॥ ३७ ॥
तत्र पूर्वं मया नीडं कृतमासीत्स्फुरन्मणि ।
देव्या ध्याननिषण्णायां यस्मिन्किल रमे सुताः ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके दक्षिण तने पर एक शाखा है, जिसमें कनक के
सदृश पीले पल्लव लगे हुए हैं, रत्नों के सदुश चमकीले पुष्प-गुच्छों के कारण तनिक भी अवकाश नहीं
है ओर चन्द्रबिम्ब के सदृश प्रकाशमान फल भरे पड़े हैं