Upashama Prakarana (Dissolution) · Sarga 23
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- Verses 1–9समा सकते हैं, जहाँ पर न जलाशय हैं, न समुद्र हैं, न पर्वत हैं, न वन हैं, न तीर्थ हैं, न नद…
- Verses 10–12बलि ने कहा : हे महामते, आधि-व्याधि से रहित वह देश कौन है, कैसे वह मिलता है और हे प्रभो कि…
- Verse 13विरोचन ने कहा : हे पुत्र, यदि देवता ओर असुर मिलकर लाख गुने भी हों, तो भी वहाँ पर उस बलवान…
- Verse 14हे पुत्र, वह मन्त्री न तो इन्द्र है, न कुबेर है, न कोई देवता है ओर न असुर है, जो कि तुमसे…
- Verse 15क्यो मेरे पास आयुध अथवा योद्धा नही है, जो मैं उस पर विजय प्राप्त कर सकूँ ? ऐसा यदि बलि की…
- Verse 16तुम उस पर क्या विजय प्राप्त करोगे, बल्कि उसीने तुम्हारे जैसे बहुत से लोगों पर विजय प्राप्…
- Verse 17हमारे पूर्वज आदि को भी उसीने अपने वश में कर विष्णु द्वारा मरवाया है, इस आशय से कहते हैं ।…
- Verses 18–19सबको विवेक का उपदेश देनेवाले नारायण आदि देवताओं को भी उसने भृगु आदि के शाप के निमित्त के…
- Verses 20–21क्रोध ने यद्यपि सुर और असुरो के समूह को स्वतन्त्र नहीं छोड़ा, उसमें कोई गुण भी नहीं हैं आ…
- Verses 22–24हे पुत्र, उसी प्रभु द्वारा यदि वह मन्त्री जीता जाता है; तो सुजेय होता है। अन्यथा तो वह पर…
- Verses 25–29उसमें सबको जीतने की केवल शक्ति ही नहीं है, किन्तु त्रैलोक्य को उत्पन्न करने की शक्ति भी ह…