Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 23, Verses 10–12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 23, verses 10–12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 10-12
संस्कृत श्लोक
बलिरुवाच ।
आधिव्याधिविनिर्मुक्तः कः स देशो महामते ।
कथमासाद्यते चापि केन वाधिगतः प्रभो ॥ १० ॥
कः स तादृग्विधो मन्त्री राजा चापि महाबलः ।
हेलालूनजगज्जालैर्योऽस्माभिरपि नो जितः ॥ ११ ॥
अपूर्वमेतदाख्यानं ममामरभयप्रद ।
कथयापनयास्माकं हृद्व्योम्नः संशयाम्बुदम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
बलि ने कहा : हे महामते,
आधि-व्याधि से रहित वह देश कौन है, कैसे वह मिलता है और हे प्रभो किसको वह मिला है ? पूर्वोक्त
प्रकार का वह मन्त्री कौन है ओर वह महाबली राजा कौन है, जिसे कि हम लोग भी जीत न सके जिन्होने
अनायास तीनों लोकों को छिन्न-भिन्न कर डाला हे देवताओं को भय देनेवाले, पिताजी, यह अपूर्व
आख्यान मुझसे कहिये ओर मेरे हृदयरूपी आकाश में से संशयरूपी मेघ को दूर कीजिये