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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 23, Verses 18–19

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 23, verses 18–19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 18,19

संस्कृत श्लोक

नारायणादयो देवा अपि सर्वावबोधिनः । तेनाक्रम्य यथाकाममवटेषु निवेशिताः ॥ १८ ॥ तत्प्रसादेन साटोपं पञ्चमात्रशरः स्मरः । त्रैलोक्यमिदमाक्रम्य सम्राडिव विवल्गति ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

सबको विवेक का उपदेश देनेवाले नारायण आदि देवताओं को भी उसने भृगु आदि के शाप के निमित्त के उद्घाटन द्वारा उन पर आक्रमण कर अपने इच्छानुसार गर्भरूपी गर्तो मे प्रविष्ट कराया । केवल पाँच बाणवाला कामदेव उसीके प्रसाद से इन तीनों लोकों पर बड़े आटोप के साथ आक्रमण कर सम्राट के समान समृद्ध हो रहा हे