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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 23, Verse 15

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 23, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

तत्रासिमुसलप्रासवज्रचक्रगदादयः । हेतयः कुण्ठतां यान्ति दृषदीवोत्पलाहतिः ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

क्यो मेरे पास आयुध अथवा योद्धा नही है, जो मैं उस पर विजय प्राप्त कर सकूँ ? ऐसा यदि बलि की ओर से प्रश्न हो, तो उस पर भले ही तुम्होरे पास आयुध और योद्धा हों; पर वह उनका विषय नहीं हो सकता, ऐसा कहते हैं। जैसे पत्थर पर कमल का आघात कुण्ठित हो जाता है, वैसे ही उस पर तलवार, मूसल, भाले, व्र, गदा आदि आयुध कुण्ठित हो जाते हैं