Sthiti Prakarana (Existence) · Sarga 62
इकसठवाँ सर्ग समाप्त बासठवाँ सर्ग श्रीरामचन्द्रजी में शास्त्रोक्त सब गुणों -सी समृद्धि का कथन और अधम पुरुष की भी सत्संग और पौरुष से उत्तम स्थिति का प्रतिपादन ।
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- Verse 1मूढो के चिन्तन योग्य विषयों के परित्याग से बार-बार सत् शास्त्र का विचार करना चाहिए, ऐसा…
- Verse 2उत्तम कुल में उत्पन्न हुए, विषयतृष्णा शून्य, तत्त्वज्ञानी महापुरुष के साथ शास्त्र का विचा…
- Verse 3वेदान्त में उपयोगी अन्यान्य शास्त्रों के, सत्कर्म, सदाचार आदि के ओर सज्जनों की संगति, वैर…
- Verse 4उक्तगुण आप में हैं ही, ऐसा कहते है । हे श्रीरामचन्द्रजी, आप बाह्य ओर आभ्यन्तर दरनदरों को…
- Verse 5अब श्रीरामचन्द्रजी में ज्ञान से जीवन्मुक्तता की सम्भावना करते हुए कहते हैं। सचमुच आप जिसस…
- Verse 6जीवन्मुक्ति की सम्भावना में बीजभूत मुक्त मन का लक्षण कहते हैं। सब बाह्य पदार्थों की चिन्त…
- Verse 7इस प्रकार मुक्त मनवाले आपकी चेष्टा का इस समय संसार में पूर्वोक्त जीवन्मुक्त पुरुष राग-द्व…
- Verse 8जो लोग बाहर लोकोचित आचारवाले होकर विहार करते हैं, ज्ञानरूपी नौका से युक्त वे बुद्धिमान पु…
- Verse 9जो सज्जन पुरुष आपके सदुश बुद्धिवाला और समदृष्टि है, वही सुदृष्टि पुरुष मुझसे कही गई ज्ञान…
- Verse 10तो क्या जीवन्मुक्त हुआ मैं शरीर का त्याग अथवा यथेष्ट आचरण करूँ ? इस पर नहीं ऐसा कहते हैं…
- Verse 11जैसे ओर गुणी पुरुष शान्ति को प्राप्त हुए हैं वैसे ही आप परमशान्ति को प्राप्त होइए | जो स्…
- Verse 12शुद्ध सात्विक जन्मवाले जीवन्मुक्त पुरुषों के जो स्वाभाविक शम, दम आदि गुण हैं उनका उपार्जन…
- Verse 13क्योकि पुरुष जिन्हीं जाति गुणों का सदा यहाँ सेवन करता है, दूसरी जाति में उत्पन्न होकर भी…
- Verse 14कमरधीनता को प्राप्त हुए जीव पुर्वजन्म के सब भावों को प्राप्त होते हैं, राजा की सेनाओं को…
- Verse 15पुरुष चाहे, राक्षस, पिशाच, शूद्र आदि तामसी योनि में उत्पन्न हुआ हो, चाहे क्षत्रिय, वैश्य…
- Verses 16–19पूर्वोक्त बात को ही विस्तार से कहते हैं। अपने विवेक से ही सन्त लोग देवता आदि सात्विक योनि…
- Verse 20सब प्राणियों के आत्यन्तिक दुःख की निवृत्ति से उपलक्षित, निरतिशय आनन्दरूप होने के कारण अत्…
- Verse 21हे श्रीरामचन्द्रजी, विवेक की विपुल महिमा से युक्त, बढ़े हुए शम, दम आदि गुणों से मनोहर इस…
- Verse 1॥ श्री गणेशाय नमः ॥ आदिकवि श्रीमद्वाल्मीकिमहामुनिप्रणीत श्रीं योगवासिष्ठ महारमायण परमहंस…
- Verses 2–16एकमात्र प्रस्तुत कथा का ही अवलम्बन करके प्रतिज्ञात अर्थ का वर्णन करनेवाले महर्षि उपशम-प्र…
- Verse 17उक्त ध्वनि से मुनि वसिष्ठजी का उन्नत स्वर भी उस प्रकार तिरोहित हो गया, जिस प्रकार मेंघों…
- Verse 18उस ध्वनि से पिंजडे में स्थित पक्षी क्षुब्ध पंखों से युक्त होकर चारों ओर से उस प्रकार क्षु…
- Verse 19उस समय भय से त्रस्त हुए बालक धात्रियों के स्तनमध्य में रोदन शब्दपूर्वक ऐसे लिपट गये, जैसे…
- Verse 20क्षुब्ध हुए प्रवाह से युक्त नदियों से जैसे जलकण उडते हैं, वैसे ही उस ध्वनि से राजाओं के श…
- Verses 21–22उस प्रकार महाराज दशरथ के घर के प्रक्ुब्ध होने पर, चतुर्थं वय में दिवस के प्राप्त होने पर…
- Verse 23हे निष्पाप राघव, मैंने जो यह आपसे वाग्जाल यानी तत्त्वोपदेश के रूप में जो वचन कहे हैं, उनस…
- Verse 24श्रीरामजी, मेरी वाणी के इस प्रकार अविनाशी अर्थ का आपने क्या उस तरह ग्रहण किया, जिस तरह हं…
- Verse 25हे साधो, इसका अपनी बुद्धि से आद्योपान्त बार-बार विचार कर इसी मार्ग से यानी पहले उपदिष्ट व…
- Verse 26श्रीरामजी, इस बुद्धि से (वृत्ति से) विहार कर रहे आप कभी भी बद्ध नहीं होंगे । यदि इस वृत्त…
- Verse 27श्रीरामभद्र, जैसे दीपक को त्यागनेवाला तथा अन्धपुरुष रात्रि में गर्त में गिर जाता है, वैसे…
- Verse 28हे भद्र, मेरे द्वारा कथित अर्थ की सिद्धि के लिए आपको असंग होकर यथा प्राप्त यानी समयानुसार…
- Verses 29–30हे सभ्यगण, हे महाराज दशरथ, हे श्रीरामजी, हे लक्ष्मण तथा अन्यान्य नृपवर्ग आप सभी आज अपने-अ…
- Verses 31–33श्री वाल्मीकिजी ने कहा : महर्षि वसिष्ठ महाराज के द्वारा इस प्रकार संबोधित की गई वह सभा उठ…
- Verses 34–35अन्यान्य राजाओं ने महाराज दशरथ की स्तुति की, श्रीरामचन्द्रजी को नमस्कार किया तथा महर्षि व…
- Verse 36महर्षि वसिष्ठजी के चरणों में निर्मल पुष्पों की अंजलि समर्पण करके महाराज दशरथजी, भार्याओं…
- Verse 37श्रीरामभद्र, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न अपने आश्रम में प्राप्त गुरुजी के चरणों की भक्तिपूर्वक प…
- Verse 38अपने स्थान में आकर उन सब श्रोताओं ने स्नान किया, देवता ओर पितरो की पूजा की तथा विप्र ओर अ…
- Verses 39–42इन क्रियाओं से निवृत्त होकर उन श्रोताओं ने ब्राह्मण आदि से लेकर नौकर पर्यन्त अपने-अपने पर…
- Verse 43दैनिक क्रियाओं के साथ सूर्य भगवान के अस्ताचल की ओर प्रस्थान करने पर तथा रात्रिक्रियाओं के…