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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, Verses 31–33

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, verses 31–33 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 31

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

श्री वाल्मीकिजी ने कहा : महर्षि वसिष्ठ महाराज के द्वारा इस प्रकार संबोधित की गई वह सभा उठ खडी हुई, समस्त सभा का वदन पद्म की तरह था, अतएव वह विकासयुक्त कमलिनी के सदृश भली मालूम पड़ती थी