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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, Verse 6

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

चिन्तामुक्तकलावत्या मुक्तकल्पनया स्थितम् । मनो मुक्तविभागं च मुक्तमेव न संशयः ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

जीवन्मुक्ति की सम्भावना में बीजभूत मुक्त मन का लक्षण कहते हैं। सब बाह्य पदार्थों की चिन्ता से रहित एवं भीतर परमात्मा के साथ क्षीर-नीर के तुल्य एकता होने से ब्रह्माकार परिणामरूप कुशलतावाली कल्पना से जो मुक्‍्तों के अनुभव से सिद्ध है, स्थित और द्वैतरहित मन मुक्त ही है, इसमें कोई संदेह नहीं है