Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
ये स्वभावा महासत्या नृणां सात्त्विकजन्मनाम् ।
तान्भजन्पुरुषो याति पाश्चात्योदारजन्मताम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
शुद्ध सात्विक जन्मवाले जीवन्मुक्त पुरुषों के जो स्वाभाविक शम, दम आदि गुण हैं उनका
उपार्जन कर रहा साधारण पुरुष भी क्रमशः ज्ञान प्राप्त करके अन्तिम जीवन्मुक्त शरीर को प्राप्त होता
है