Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 62, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 62 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
यानेव सेवते जन्तुरिह जातिगुणान्सदा ।
अथान्यजातिजातोऽपि जातिं भजति तां क्षणात् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
क्योकि पुरुष जिन्हीं जाति गुणों का सदा यहाँ सेवन करता है, दूसरी जाति में उत्पन्न होकर
भी वह एक क्षण में उस जाति को प्राप्त होता हे । भाव यह कि उत्कृष्ट जाति के गुणों का सेवन करने पर
उत्कृष्ट जाति में जन्म पाता है ओर अधम जाति के गुणों का सेवन करने पर अधम जाति में जन्म पाता
है, यह नियम है