Sthiti Prakarana (Existence) · Sarga 29
अटद्जाईसवाँ सर्ग समाप्त उनतीसवाँ सर्ग दाम आदि के, जिन्हें देवताओं के प्रयत्न से देहाभिमान प्राप्त हो गया था, युद्ध मेँ विषाद का, तदनन्तर पलायन और पराजय का वर्णन ।
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- Verses 1–4श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे रामचन्द्रजी, इस प्रकार के व्यग्रता बहुल रणारम्भवाले अत्यन्त क्रो…
- Verse 5इतने समय तक अहंकार का दृढ अभ्यास होने के कारण वासना से ग्रस्तचित्त हुए दाम, व्याल ओर कट न…
- Verse 6अभिमान का अभ्यास अहंकार की दढता का हेतु है, इसे दृष्टान्त द्वारा दशति है । जैसे अत्यन्त न…
- Verse 7जैसे दूर स्थित वस्तु दर्पण में प्रतिबिम्बित नहीं होती वैसे ही अभ्यास का त्याग करने के कार…
- Verse 8जब अहंकार ही आत्मा है, ऐसी वासनावाले दाम आदि हुए, तब मेरा जीवन रहे, मेरा धन हो, इस प्रकार…
- Verses 9–10तदनन्तर विहित-निषिद्ध प्रवृत्ति की वासना से वे ग्रस्त हुए । तदनन्तर मेरा शरीर नीरोग, दृढ़…
- Verse 11पैर से लेकर मस्तक तक मेरा सारा शरीर केसे स्थित हो, “मेरा” इस प्रकार की तृष्णा से कृपण हुए…
- Verse 12मेरा शरीर स्थिर हो, मेरे सुख के लिए धन हो, इस प्रकार की बद्धमूल हुई बुद्धि से युक्त उन लो…
- Verse 13दाम आदि दैत्यों के वासनायुक्त होने के कारण शरीर में अल्प सामर्थ्य होने से पहले जो प्रहार…
- Verse 14इस जगत में कैसे अमर हों, इस चिन्ता से विवश हुए वे जल से निकाले गये कमलों की तरह दीनता को…
- Verse 15अपने में अहंकारवाले दाम, व्याल और कट की स्त्री, अन्न-पान से विषयों की भावना में स्थित अतए…
- Verse 16तदनन्तर जैसे मत्त हाथियों से खूब कुपित हुए वन में हरिण अपने जीव के विषय में प्रयत्नशील हो…
- Verse 17वे लोग हमें मारेंगे, हमें मारेंगे, इस चिन्ता से आहत हृदय होकर कुपित ऐरावतवाले रण में धीरे…
- Verse 18मरण से भयभीत हुए एकमात्र शरीर को चाहनेवाले उनके सिर पर अल्प बल होने के कारण शत्रुओं ने पै…
- Verse 19जैसे लकड़ियों के जल जाने पर अग्नि चरु को नहीं जला सकती वैसे ही क्षीण बल होने के कारण वे अ…
- Verse 20प्रहार कर रहे देवताओं के सामने मच्छररूपता को प्राप्त हुए क्षत-विक्षत शरीरवाले वे अन्यान्य…
- Verse 21बहुत क्या कहे, मरण से भयभीत चित्तवाले वे दाम आदि दैत्य देवताओं के आक्रमण करने पर समरभूमि…
- Verses 22–23स्वर्ग में ख्याति प्राप्त किये हुए दाम-व्याल-कट नामक उन दैत्यों के भयभीत होकर चारों ओर भा…
- Verses 24–30सुमेरु पर्वत के कुजों में, पर्वतों के शिखरों की चट्टानों पर, समुद्रों के तटों पर, मेघों क…
- Verses 31–34वे लोग आयुधो से युक्त थे, सेनाओं ने माया द्वारा ओर बाणो द्वारा उनके कवच ओर आयुध नष्ट -भ्र…