Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 29, Verses 24–30

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 29, verses 24–30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 24-30

संस्कृत श्लोक

अमराचलकुञ्जेषु शिखराणां शिखासु च । तटेषु वारिराशीनां पयोदपटलेषु च ॥ २४ ॥ सागरावर्तगर्तेषु श्वभ्रेषूद्यत्सरित्सु च । जङ्गलेषु दिगन्तेषु ज्वलत्सु विपिनेषु च ॥ २५ ॥ तद्वाणोच्छिन्नदेशेषु ग्रामेषु नगरेषु च । अटवीषूग्रपक्षासु मरुभूमिदवाग्निषु ॥ २६ ॥ लोकालोकाचलान्तेषु पर्वतेषु ह्रदेषु च । आन्ध्रद्वविडकाश्मीरपारसीकपुरेषु च ॥ २७ ॥ नानाम्भोधितरङ्गासु गङ्गाजलघटासु च । द्वीपान्तरेषु जालेषु जम्बूखण्डलतासु च ॥ २८ ॥ सर्वतः पर्वताकाराः पतितास्ते सुरारयः । विस्फोटिताङ्गचरणा विभिन्नकरबाहवः ॥ २९ ॥ शाखालग्नान्त्रतन्त्रीका मुक्तरक्तभरच्छटाः । व्यस्तशेखरमूर्धानो निष्क्रान्ताः कुपितेक्षणाः ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

सुमेरु पर्वत के कुजों में, पर्वतों के शिखरों की चट्टानों पर, समुद्रों के तटों पर, मेघों की घटाओं में, सागर के भँवररूप गर्तो में, अन्यान्यगर्तो में, बाढ से बढी हुई नदियों में, जंगलों में, जलते हुए दिशा के प्रान्त प्रदेशों में, जलते हुए वनों में, देवता और असुरों के बाणों से ध्वस्त हुए देशों में, ग्रामो ओर नगरों में, सिंह, व्याघ्र आदि के निवासभूत गहन अटवियों में, मरुभूमियों में, लोकालोकपर्वत के प्रान्त देशों में, पर्वतो में, तालाबों में, आन्ध्र, द्रविड, कश्मीर ओर पारसीक नगरों मे, नाना (५) समुद्रो में जिनकी तरंगे गिरती हैं, ऐसे गंगाजल के मुहानो मे, अन्यान्य द्वीपोंमें, मछलियों को पकड़ने के लिए फै लाए हुए जालो मं, जम्बूखण्डनामक देशों की लताओं में, मतलब यह कि सब ओर पर्वत के आकारवाले वे दैत्य गिरे। उनमें किसी के शरीर ओर पैर छिन्न-भिन्न थे तो किसी के हाथ और भुजाएँ कट गई थी, किन्हीं के आँतड़ीरूपी ताँतें शाखाओं मेँ लगी थी, ओर वे सब के सब शरीर से खून की धारा की वर्षा कर रहे थे उनके मस्तक के माला, आभरण आदि अस्त-व्यस्त हो गये थे, उनके चरण अत्यन्त कट-फट गये थे, आँखों से क्रोध टपक रहा था