Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 29, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 29, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
सवासनत्वाद्वपुषामल्पसत्त्वात्सुरद्विषाम् ।
या तु प्रहारपरता मार्जितेवाशु साभवत् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
दाम आदि दैत्यों के वासनायुक्त होने के कारण शरीर में अल्प सामर्थ्य होने से पहले जो
प्रहार करने में तत्परता थी, वह तुरन्त मिटाई हुई लिपि के समान कार्य में असमर्थ हो गई