Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 29, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 29, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 29 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
आपादमस्तको देहः कथं मे भवतु स्थिरः ।
ममेति तृष्णाकृपणा दीनतां ते समाययुः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
पैर से लेकर मस्तक तक मेरा सारा शरीर
केसे स्थित हो, “मेरा” इस प्रकार की तृष्णा से कृपण हुए वे दीनता को प्राप्त हुए