Guru's AddaGuru's Adda

Utpatti Prakarana (Creation) · Sarga 33

बत्तीसवाँ सर्ग समाप्त तैंतीसवाँ सर्ग संकल्पजनित विमान में स्थित सरस्वती और लीला द्वारा देखे गये दोनों सेनाओं के संग्राम का वर्णन ।

8 verse-groups

  1. Verse 1श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्‌ इस युद्ध का कुछ संक्षेप से मुझसे वर्णन कीजिए, क्योकि इन उ…
  2. Verses 2–5रामचन्द्रजी, तदुपरान्त वे देवियाँ उस संग्राम को देखने के लिए वहीं पर रोके गये मन से कल्पि…
  3. Verses 6–10ऐसा घमासान युद्ध हुआ कि आकाश में तैर रहे अस्त्र-शस्त्रों की चंचल धार के अग्रभाग से आकाशमण…
  4. Verses 11–21उसमें अर्धचन्द्राकार नोकवाले बाणों की लगातार वृष्टि से शूरवीरों के सिर और हाथ काटे गये थे…
  5. Verses 22–27चतुरंगिणी सेना के संचलन से उड़ी हुई धूली से वहाँ पर चारों ओर कुहरा छा गया था, चमचमा रहे अ…
  6. Verses 28–29वहाँ सेनादर्शन से व्याकुल हुई वेतालों की स्त्रियँ मुद्गर छोड रही थी, आकाश में ऊँचे उठाये…
  7. Verses 30–40वहाँ पर अपने सैनिकों की तलवार ओर छूरियों की कुशल वृष्टि से सन्तुष्ट हुए राजाओं द्वारा उनक…
  8. Verses 41–47बड़े-बड़े ताड के वृक्षों के समान ऊँचे पुरुषों से, जो कि हाथ में कुदाली लिए थे, वनभूमियाँ…