Guru's AddaGuru's Adda

Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker) · Sarga 4

13 verse-groups

  1. Verse 1श्रीव्यासदेवजी की वर्तमान काल में भी जीवन्मुक्तता दिखलाते है । इस समय भी ये श्रीव्यासजी व…
  2. Verse 2मुक्ति चाहे सदेह हो अथवा विदेह हो, वह विषयाधीन तो कदापि नहीं है। यदि मुक्ति स्वर्गा आदि क…
  3. Verses 3–4तब ये सदेह कैसे हैं, इस पर कहते हैं। जीवनमुक्त मुनिश्रेष्ठ श्रीवेदव्यासजी को सदेह के सदृश…
  4. Verse 5जल में कदाचित्‌ अस्वच्छता, मलिनता आदि से जनित अन्तर भी हो सकता है, ऐसी शंका से दूसरे दृष्…
  5. Verse 6सदेहमुक्ति, विदेहमुक्ति, बन्धन, मुक्ति आदि व्यवहार भी कल्पना से ही होते हैं परमार्थ दृष्ट…
  6. Verse 7हे रामचन्द्र, आप सर्वत्र तत्‌-तत्‌ द्रष्टान्तों के स्मरण का विवक्षित सारभूत अंश वस्तु की…
  7. Verses 8–9भाव यह कि उक्त दृष्टान्त एक अंश में है, सब अंशो में नहीं। यहाँ पर सदेहमुक्ति की और विदेहम…
  8. Verse 10भाग्य के प्रतिकूल होने पर पुरूषप्रयत्न व्यर्थ देखा जाता है ओर श्रेयांसि बहुविघ्नानि“ ऐसा…
  9. Verse 11वह पौरुष (पुरुषप्रयत्न) क्या है, जिसकी आप इतनी बड़ी प्रशंसा करते हैं ? इस प्रश्नपर कहते ह…
  10. Verse 12जो मनुष्य जिस पदार्थ की अभिलाषा करता है, उसकी प्राप्ति के लिए यत्न भी करता है। यदि बीच मे…
  11. Verses 13–17मूल में क्रमात्‌“ पद कहीं पर विघ्नो द्वारा कार्य का विघात शास्त्रोक्त क्रम का त्याग करने…
  12. Verses 18–19आधुनिक अल्प पुरुषार्थ अनेक करोड़ कल्पो से उपार्जित अनन्त प्राक्तन कर्मो पर विजय कैसे प्रा…
  13. Verse 20महाधनी, प्रबल और महामति लोगों को प्राप्त होनेवाला पौरुष निर्धन, निर्बल और अल्पबुद्धिवाले…