Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 4, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 4, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 4 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
यो यमर्थं प्रार्थयते तदर्थं चेहते क्रमात् ।
अवश्यं स तमाप्नोति न चेदर्धान्निवर्तते ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
जो मनुष्य जिस पदार्थ की अभिलाषा करता है, उसकी प्राप्ति
के लिए यत्न भी करता है। यदि बीच में ही उसका त्याग न कर दे, तो वह क्रमश: उसको अवश्य
प्राप्त करता है