Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2) · Sarga 124
एक सी बाईसवाँ सर्ग समाप्त एक सौ तेईसवाँ सर्ग द्वीप और समुद्र में गये हुए विपश्चितों की पश्चिम की ओर गये हुए क्रम से विविध दशाओं का वर्णन।
18 verse-groups
- Verse 1इस रीति से समुद्र और द्वीपों में जानेवाले वे चार विपश्चित् पैदल दृश्यरूप अविद्या के अन्त…
- Verse 2शरीर के छेद-भेद से रहित विपश्चितां ने समुद्र से द्वीप को, द्वीप से समुद्र को इस प्रकार द्…
- Verse 3उन चार विपश्चिता में से पश्चिम दिगन्त को देखने के लिए प्रवृत्त विपश्चित् को अपने को अमर…
- Verse 4उसे पचाना सरल न था, अतएव उस मछली ने क्षीरसागर में पहुँचर उसे उगल दिया । तदनन्तर क्षीरसागर…
- Verse 5दक्षिण दिगन्त को देखने के लिये प्रवृत्त विपश्चित् को इक्षुरस सागर में स्थित दक्ष नगर में…
- Verse 6पूर्व दिगन्त को देखने के लिए प्रवृत्त विपश्चित् ने गंगा के हजार मुहानों को एक-एक करके दे…
- Verse 7उत्तर दिगन्त को देखने के लिए प्रवृत्त विपश्चित् ने उत्तर कुरुदेश में श्रीदेवीजी के साथ ल…
- Verse 8उक्त अणिमा आदि ऐश्वर्य के प्रताप से ही मगर और जलगजों द्वारा पहले निगली फिर उगली गई मूर्ति…
- Verse 9फिर पश्चिम दिगन्त की ओर ग्रवृत्त विषश्चित् के वृत्तान्त का वर्णन करते हैं / पश्चिम की ओर…
- Verse 10फिर पूर्व विपश्चित् का समाचार कहते हैं / क्रौंचद्वीप पर्वत पर वन में राक्षस पूर्वं विपश्…
- Verse 11फ़िर दक्षिण विपश्चित् का वृत्तान्त कहते हैं / शाकद्वीप में दक्षिण की ओर चला हुआ विपश्चित…
- Verse 12फ़िर उत्तर की ओर चले विपश्चित् का कृत्त कहते हैं / उत्तर विपश्चित् वेग से बड़े-बड़े और…
- Verse 13तदुपरान्त एक सौ वर्ष बाद अग्निदेव के अनुग्रह से वहाँ उसी सिद्ध ने उसे शाप से मुक्त कर दिय…
- Verse 14फिर पूर्व विषश्चित् का वृत्तान्त कहते हैं / परम धर्मात्मा पूर्व विपश्चित् कान्यकुब्ज दे…
- Verse 15नारियल के फलों पर निर्वाह करनेवाला वह मेरुपर्वत के उत्तर तरफ स्थित कल्पवृक्ष वन में दश वर…
- Verse 16पश्चिम विपश्चित् पक्षियों की वशीकरण विद्या में पारंगत था, अतएव पहले उसे गरुड़ ने पीठ पर…
- Verse 17कोमल लताओं से भरे हुए मन्दराचल पर, मन्दार वृक्षों के निकुंजरूप गृहों में मन्दरी नाम की कि…
- Verses 18–24इसके उपरान्त पूर्व विपश्चित् नारियल के वन से क्षीरसागर के तट पर गया । वहाँ की कल्पवृक्ष…