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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 124, Verse 10

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 124, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 124 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

तुल्यकालमसंख्यातमीश्वरप्रतियोगिनः । कर्मजालं जगज्जातं कुर्वन्त्यनुभवन्ति च ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

फिर पूर्व विपश्चित्‌ का समाचार कहते हैं / क्रौंचद्वीप पर्वत पर वन में राक्षस पूर्वं विपश्चित्‌ को निगल गया। तदनन्तर उस राक्षस को विपश्चित्‌ ने आँतड़ियों के छेदने द्वारा चीर डाला