Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 124, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 124, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 124 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
तेन यस्य यदायातं पुरो वस्तु विपश्चितः ।
स तेन संविन्मयतामेत्य तद्वशमागतः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
उत्तर दिगन्त को देखने
के लिए प्रवृत्त विपश्चित् ने उत्तर कुरुदेश में श्रीदेवीजी के साथ लीला कर रहे भगवान् की आराधना
कर अणिमा, महिमा आदि एश्वर्य प्राप्त किया । अतएव उक्त विपश्चित् को ऐश्वर्य के प्रताप से दिगन्त
(५) भूभृत् शब्द श्लिष्ट है इसके राजा और पर्वत दो अर्थ हैं, पर्वत समुद्र की तरंगों से भयभीत
नहीं होता भूभृत् होने से वे भी नहीं हुए ।
में व्याप्त मरणप्रयुक्तभय दुःख नहीं देते अर्थात् वह अमर हो गया