Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 124, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 124, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 124 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
अब्दोऽपि व्याप्तिमानेकस्तुल्यकालं पृथक्क्रियाः ।
आह्लादस्तेन पादेन करोत्यनुभवत्यपि ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
फिर पश्चिम दिगन्त की ओर ग्रवृत्त विषश्चित् के वृत्तान्त का वर्णन करते हैं /
पश्चिम की ओर चले विपश्चित् को, जिसकी अंगशोभा कुशकी-सी थी, पक्षिराज गरुड़ ने
अपनी पीठ पर बैठाकर वेग से कुशद्वीप और अनेक सागरों को पार कर दिया