Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 124, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 124, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 124 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
सुप्तं तैर्भूमिशय्यासु भुक्तं द्वीपान्तरेषु च ।
विहृतं वनलेखासु प्रक्रान्तं मरुभूमिषु ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
फिर पूर्व विषश्चित् का वृत्तान्त कहते हैं /
परम धर्मात्मा पूर्व विपश्चित् कान्यकुब्ज देश से उत्तर की ओर गया । वहाँ आठ वर्ष तक
प्रधानरूप से नारियलों की उत्पत्तिवाले देश में रहनेवाले लोगों का राजा बन गया । तदुपरान्त
उसे पूर्व जन्म का स्मरण हो गया