Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 124, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 124, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 124 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
एको विष्णुश्चतुर्भिः स्वैर्बाहुभिर्वा शरीरकैः ।
पृथक्कुर्वन्क्रियाः पाति जगद्भुंक्ते वराङ्गनाः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
फ़िर दक्षिण विपश्चित् का वृत्तान्त कहते हैं /
शाकद्वीप में दक्षिण की ओर चला हुआ विपश्चित् दक्ष के शाप से एक क्षण में यक्ष बन गया एक
वर्ष तक यक्ष बने रहने के बाद उसकी मुक्ति हुई