Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 16
पन्द्रह्वौँ सर्ग समाप्त सोलहवाँ सर्ग सामने उपस्थित हुए तथा आसन आदि से पूजित हुए महाराज वसिष्ठजी द्वारा किये गये भुशुण्ड के जन्म, कर्म आदि के प्रश्नों का वर्णन ।
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- Verse 1महाराज वसिष्ठजी ने कहा : भद्र श्रीरामजी, तदनन्तर मैं उस भुशुण्ड के सामने उस प्रकार गिरा (…
- Verse 2जिस प्रकार भूकम्प से सागर विक्षुब्ध हो जाता है, उस प्रकार मेरे पतन से जनित मन्द पवन से कौ…
- Verse 3अनन्तर त्रिकालदर्शी होने के कारण उस भुशुण्ड ने देखने से ही - यद्यपि वहाँ मेरा जाना अतर्कि…
- Verse 4तदनन्तर जिस प्रकार पर्वत से छोटा मेघ उठे, उस प्रकार वह पत्तों के ढेर से उठ खडा हुआ ओर हे…
- Verse 5स्वागत वचनं के साथ ही साथ दोनों हाथों से अपने संकल्पमात्र से उत्पादित पुष्पांजलि भरकर मेर…
- Verses 6–9तदनन्तर आपके बिराजने के लिए यह आसन है, यों कहकर वह कौओं का अधिपति भुशुण्ड आसन लाने के लिए…
- Verse 10भुशुण्ड ने कहा : भगवन्, बड़े सौभाग्य का विषय है कि दीर्घकाल के अनन्तर आज हम लोगों के ऊपर…
- Verse 11हे मुने, दीर्घकालिक मेरे पुण्य की राशि से प्रेरित तथा मान्यो में एकमात्र मान्यतम आपका इस…
- Verse 12महाराज, मूलभूत माया से बने इस जगत में दीर्घकाल से विचरण कर रहे आपके पावनतम चित्त में अखंड…
- Verse 13महाराज, आज आने का कष्ट उठाकर आपने अपनी आत्मा को क्यों दुःख पहुँचाया ? आज्ञादायी वचनों के…
- Verse 14हे मुनिवर, आपके चरणों के दर्शन से ही मैंने सब कुछ जान लिया, आपने अपने आगमन के पुण्यों से…
- Verse 15“सव कुछ जान लिया” यह जो पहले कहा गया था, उसीका स्पष्टीकरण करते हैं। इन्द्रसभा में चिरंजीव…
- Verse 16हे मुने, यद्यपि यहाँ आपके आने का प्रयोजन मैंने पहले से ही जान लिया, तथापि आपके वाक्यामृतर…
- Verse 17तीनों कालों में निर्मल ज्ञान रखनेवाला चिरंजीवी इस भुशुण्ड ने जब वैसे कहा, तब वहाँ मैंने य…
- Verse 18हे पक्षियों के स्वामिन्, जो कुछ यह कह रहे हो, वह सब यथार्थ में सत्य ही है, चिरंजीवी केवल…
- Verse 19हे पक्षीराज, महान भाग्य से तुम्हारे अन्तःकरण में चारों ओर से शान्ति का राज्य है, तुम कुशल…
- Verse 20प्राणियों की उत्पत्ति, विनाश, गति, आगति, विद्या एवं अविद्या को जाननेवाले हे पक्षिराज, तुम…
- Verse 21हे साधो, तुम्हारी कितनी आयु है, तुम अपना कौन-सा इतिवृत्त (विगत कल्पान्तचरित्र) जानते हो औ…
- Verse 22भुशुण्ड ने कहा : हे मुने, आप जो मुझसे पुछ रहे हैं, उस सबका मैं यह वर्णन (उत्तर) कर रहा हू…
- Verse 23हे महानुभाव, तीनों लोकों के नियन्ता और परम पूज्य आपके सदृश उदारबुद्धि महात्मा जिस वृत्तान…