Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 16, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 16, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
पत्रपुञ्जात्समुत्तस्थौ मेघशाव इवाचलात् ।
हे मुने स्वागतमिति प्रोवाच मधुराक्षरम् ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर जिस प्रकार
पर्वत से छोटा मेघ उठे, उस प्रकार वह पत्तों के ढेर से उठ खडा हुआ ओर हे मुनिराज, आपका
स्वागत हो", यों मधुरवाणी बोला