Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 16, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 16, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
चिरंजीवितचर्चाभिर्वयं वः स्मृतिमागताः ।
तेनेदमास्पदं पादैस्त्वं पवित्रितवानयम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
“सव कुछ जान लिया” यह जो पहले कहा गया था, उसीका स्पष्टीकरण करते हैं।
इन्द्रसभा में चिरंजीवियों के विषयों में हुई विचारणाओं के कारण ही आपके स्मृतिपथ में हम
आये ओर उसी से यह स्थान आपके चरणों का आस्पद हुआ, सचमुच आपने इस प्राणी को पवित्र
बना दिया