Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 16, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 16, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
अशङ्कितमपि प्राप्तं दर्शनान्मामनन्तरम् ।
भुशुण्डस्तु वसिष्ठोऽयं प्राप्त इत्यवबुद्धवान् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
अनन्तर
त्रिकालदर्शी होने के कारण उस भुशुण्ड ने देखने से ही - यद्यपि वहाँ मेरा जाना अतर्किक था,
तथापि वहाँ गये "हुए मुञ्चको - "यह वसिष्ठ आये हुए है", यों जाना