Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 16, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 16, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
भुशुण्ड उवाच ।
अहो भगवताऽस्माकं प्रसादो दर्शितश्चिरात् ।
दर्शनामृतसेकेन यत्सिक्ताः सद्द्रुमा वयम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
भुशुण्ड ने कहा : भगवन्, बड़े सौभाग्य का विषय है कि दीर्घकाल के अनन्तर आज
हम लोगों के ऊपर आपने अनुग्रह दर्शाया, क्योकि आपके दर्शनामृतरूपी सिंचन से सिंचे गये हम
लोग आज, पुण्यवृक्ष के सदृश, अत्यन्त पवित्र बन गये