Guru's AddaGuru's Adda

Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 103

12 verse-groups

  1. Verses 1–22को मैं क्‍यों जगाऊँ ? विदेहमुक्ति प्राप्तकर सुखपूर्वक अवस्थित रहे न। मैं भी अब यह महिला क…
  2. Verse 23^स्पशनिन नयेन च“ - यह जो कहा गया इसमें नयशब्दार्थ की जिज्ञासा कर रहे श्रीरामचन्द्रजी पूषत…
  3. Verses 24–27देह मे वुद्धि, विपरिणाम, अपक्षय आदि विकारों का अनुदय सत््वशेष में हेतु है, ऐसा उत्तर देने…
  4. Verses 28–31वह क्यो, इस पर कहते हैं। हे श्रीरामजी, जगत्‌ के व्यवहार के हेतुभूत सम्पूर्ण भावविकारों का…
  5. Verse 32चित्त में हर्षादि विकारों का उपशम हो जानेपर शरीर में भी विकार निवृत्त हो जाते हैं। चित्त…
  6. Verse 33निवसिनिक मन का विनाश हो जाने पर मृत देह भी विलीन हो जाती है, यह कहते हैं । हे श्रीरामजी,…
  7. Verse 34शिखिध्वज की देह में तो जीवनहेतुओं का चूडाला ने अवलोकन किया, यह कहते है। शिखिध्वज की वह दे…
  8. Verses 35–36प्रश्न का समाधान कर प्रस्तुत विषय का अनुसन्धान करते है। अपने स्वामी की उस तरह से अवस्थित…
  9. Verses 37–48चिरकाल के बाद तो यह स्वयं समाधि से उठ जायेगा, इसे जगाने के लिए शीघ्रता करने की मुझे क्या…
  10. Verses 49–51मुझमें जो आपकी इतनी प्रीति बढ़ गई है, इसका अतिशय कारण क्या है ? हे राजन्‌, इस जगत्‌ में म…
  11. Verses 52–60आपके द्वारा बतलाई गई समाधि से जनित जो सुख है, उससे तृप्त मुझे भी स्वर्ग की इच्छा नहीं होत…
  12. Verse 61यदि आपसे भिन्न कोई दूसरा है ही नहीं, तो आप फिर किस स्वरूप से अवशिष्ट हैं, इस पर कहते हैं…