Upashama Prakarana (Dissolution) · Sarga 82
अस्सीवाँ सर्ग समाप्त इक्यासीवाँ सर्म पूर्व में अनेक प्रयत्नों से देहरूपी घर से निर्वासित हुए चित्तरूपी वेताल की असत्ता का अनुभव और युक्ति से उपपादन ।
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- Verse 1श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे महाबाहो, पूर्वोक्त प्रकार से भली प्रकार विचार के द्वारा भीतर से…
- Verse 2जिस चित्त के द्वारा "यह समस्त जगत् आत्मस्वरूप ही है” इस प्रकार के परोक्ष साक्षात्कार से…
- Verse 3चित्त अवस्तुरूप ही है, इसका साधन कहते है। जैसे आकाशवृक्ष भ्रमवश अन्यरूप से प्रतीत होता है…
- Verse 4जैसे नौका में अवस्थित अज्ञानी बालक को तटवर्ती स्थाणु मे प्रतीत होनेवाला गति आदि परिस्पन्द…
- Verse 5मूर्खताप्रयुक्त मोहरूपी भ्रम के शान्त हो जाने पर हम लोगों को चित्त का वैसा अनुभव नहीं होत…
- Verse 6उक्त युक्तयो से चित्त का अस्तित्व है ही नहीं, चित्तात्मक केवल ब्रह्म का ही अस्तित्व है, च…
- Verse 7मेरे समस्त सन्देह शान्त हो चुके हैं, समस्त चिन्ता ज्वरों से वर्जित होकर मैं अवस्थित हूँ,…
- Verse 8जैसे प्रकाश का उपराम हो जाने पर विभिन्न विभिन्नरूपों का प्रकाशन करनेवाली चक्षुआदि से जनित…
- Verse 9मोहरूप पंजर भली प्रकार क्षीण हो गया, अहंभावना विशीर्णं हो गयी ओर इस अहंरूप आत्मा के अज्ञा…
- Verse 10जगत् शान्त होकर अद्वितीय परब्रह्मस्वरूप ही हो गया ओर भेदवस्तु सत् है ही नहीं, इसलिए मेँ…
- Verse 11चिदाभासस्वरूप, जीवस्वरूप से वर्जित, आदि ओर अन्त से शून्य, परमपावन पद को मे प्राप्त हुआ हू…
- Verse 12इस लोक में व्यवहार दृष्टि से ओर श्रुतिदृष्टि से क्रमश: चित्त आदि एवं आत्मा आदि जो अस्तित्…
- Verse 13चित्त रहे या न रहे, वह भीतर से मर जाय या जिन्दा रहे, उसके विषय में विचार करने से मेरा कौन…
- Verse 14मैं तो इतने समय तक मूर्खतावश नित्यअनित्य वस्तु के विषय में किसी प्रकार का विचार न कर रहा…
- Verse 15मन के मर जाने पर "विचार करनेवाला है या नहीं” इस प्रकार की निरर्थक विकल्प श्री भी मनरूपी व…
- Verse 16तथोक्त इस भीतरी संकल्प-कलना का परित्याग करता हूँ, इस प्रकार का निश्चयकर ॐकार के लक्ष्यभूत…
- Verse 17किये गये विचार का उपसंहार कर रहे महाराज वस्रिष्ठजी उस की निरन्तर कर्तव्यता को कहते हैं ।…
- Verse 18आत्मस्वरूप मेँ अवस्थित, स्वस्थ अपने चित्त से भली प्रकार विचार करके सत्पुरुष अपने-अपने वर्…
- Verses 19–83जिनका मान ओर मद गलित हो चुका है,जिनका अन्तःकरण प्रमुदित है, जिनकी शरद् ऋतु से समन्वित चन…