Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 82, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 82, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
चक्षुरादिभिरुद्दामै रूपैराहितसंभ्रमैः ।
अजस्रमुत्पतत्येव वीटेव तलताडिता ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
चित्त रहे या न रहे, वह भीतर से मर जाय या जिन्दा रहे,
उसके विषय में विचार करने से मेरा कौन-सा प्रयोजन है ? क्योकि मेँ तो चिरकाल से समरूप से उदित
आत्मस्वरूप हूँ