Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 82, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 82, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
स जहारालमालोकाद्दिग्विकीर्णं मनः शनैः ।
विशन्मेरुदरीं सायं भानुर्भास इवोत्करम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
जगत् शान्त
होकर अद्वितीय परब्रह्मस्वरूप ही हो गया ओर भेदवस्तु सत् है ही नहीं, इसलिए मेँ दूसरे किस विषय
का विचार करूँ ? इस असत् अर्थो की कथा से मेरा कुछ भी प्रयोजन नहीं है