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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 82, Verse 7

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 82, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

विवेश रम्भारचितं निजं पर्णोटजान्तरम् । कृतगौरं सुसौगन्ध्यमलिनीलमिवोत्पलम् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

मेरे समस्त सन्देह शान्त हो चुके हैं, समस्त चिन्ता ज्वरों से वर्जित होकर मैं अवस्थित हूँ, जिस पारमार्थिक स्वभाव से मैं अवस्थित रहता हूँ, उसी पारमार्थिक स्वभाव से इस समय स्वानुभव से भी इच्छाओं से निर्मुक्त होकर स्थित हूँ