Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 82, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 82, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
घटात्पटमुपायाति पटाच्छकटमुत्कटम् ।
चित्तमर्थेषु चरति पादपेष्विव मर्कटः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
मन के मर जाने पर "विचार करनेवाला है या नहीं” इस प्रकार की निरर्थक विकल्प श्री भी
मनरूपी वेताल के पुनर्जीवन के लिए क्यों उत्पन्न होती है, इसलिए उस विकल्प श्री का मैं परित्याग
करता ह