Sthiti Prakarana (Existence) · Sarga 13
बारहवाँ सर्ग समाप्त तेरहवाँ सर्ग मन की शक्तियों का वर्णन करके भृगु और काल का शुक्र के समीप में जाने के लिए उठना।
19 verse-groups
- Verses 1–2पूर्वोक्त जीवजातियों में से जीवन्मुक्त ही कृतकृत्य हैं और नहीं, ऐसा कहते हैं। काल ने कहा…
- Verse 3और उनसे अतिरिक्त जो चराचर प्राणी हैं, वे काठ और दीवार के तुल्य मूढ हे पुनः-पुनः जन्ममरण क…
- Verse 4वे किस लिए देहधारण करते हैं ? ऐसी यदि शंका हो तो उस पर शास्त्र-रचना द्वारा अज्ञानियों के…
- Verse 5पापकर्म का क्षय होने पर पुरुष को ज्ञानप्राप्ति होती है, इस अर्थवाले स्मृतिवचन के बल से शा…
- Verse 6जैसे सूर्य के आकाशमें भ्रमण करने से रात्रि का अन्धकार मिट जाता है वैसे ही आध्यात्मिक सत्श…
- Verse 7क्षीणता को प्राप्त न होता हुआ मन मोह के लिए ही होता है, न कि सिद्धि के लिए। वह कुहरे के स…
- Verse 8मुनिजी, देहात्मता को प्राप्त हुए (देह में आत्मबुद्धि करनेवाले) सभी जीवों का सुख-दुःख आदि…
- Verse 9जो यह मांस और हड्डियों का समूहरूप पांचभौतिक देह दिखाई देती है, यह एकमात्र मन की कल्पना है…
- Verse 10हे मुनिजी, आपके पुत्र ने मनरूपी शरीरसे जो कुछ किया, उसी को वह प्राप्त हुआ । इस विषय में ह…
- Verse 11जो आदमी अपनी वासना से जो जो कर्म करता है, वह वैसे ही उसको प्राप्त होता है, उसमें अन्य किस…
- Verse 12प्राणी अपनी केवलमनोवासना से (अनुसन्धानमात्र से) अपने मन में सोचे गये जिसका एक क्षण में नि…
- Verse 13जो सृष्टियाँ, जो नरकों के विस्तार ओर जो जन्म-मरण की इच्छाएँ हैं, वे सब मनके स्फुरण से हैं…
- Verse 14इस विषयमें केवल शब्दों का श्रवण करानेवाले (न कि तत्त्वप्रदर्शक) बहुत कथन से क्या लाभ है ?…
- Verse 15स्वर्ग के सब भोगों को चित्तशरीरसे एक क्षण में भोग कर तदुपरान्त आकाश आदिके क्रम से भूमि मे…
- Verse 16चन्द्रमा की किरणों के सम्बन्ध से, ऐसा जो कहा है, उसे स्पष्ट करते हैं। शुक्र का प्राणवायु…
- Verse 17यह कहकर जगत की स्थिति पर हंस रहे भगवान काल ने हाथ फैलाकर अपने हाथ से भृगुजी को ऐसे पकड़ा,…
- Verse 18भगवदिच्छारूप नियति की व्यवस्था बड़ी विचित्र है, ऐसा धीरे-धीरे कह रहे भगवान भृगु उदयाचल से…
- Verse 19तमाल के वृक्षों के झुण्ड से युक्त मन्दराचल में एक ही साथ खड़े हुए वे दोनों तेज के निधान उ…
- Verse 20श्रीवाल्मीकिजी ने कहा : श्रीमुनिजी के इतना कह चुकने पर दिवस बीत गया, सूर्य भगवान अस्ताचल…