Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 13, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 13, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
अन्ये तु काष्ठकुड्याभा मूढाः स्थावरजगमाः ।
अपरे क्षीणमोहास्ते किं तेषां प्रविचार्यते ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
और उनसे अतिरिक्त जो चराचर प्राणी हैं, वे काठ और
दीवार के तुल्य मूढ हे पुनः-पुनः जन्ममरण को प्राप्त होते हैं और दूसरे क्षीणमोह (तत्त्वज्ञानी) हैं ।
साधनचतुष्टय से युक्त अज्ञानी ही शास्त्रविचार के अधिकारी हैं तत्त्वज्ञानी अधिकारी नहीं हैं