Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 13, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 13, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
सर्वं चित्तशरीरेण भुक्त्वा शुक्रः क्षणादिव ।
तथेन्दुरश्मिसंघट्टात्समङ्गातापसः स्थितः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वर्ग के सब भोगों को चित्तशरीरसे एक क्षण में भोग कर तदुपरान्त आकाश आदिके क्रम से
भूमि में अवतीर्णं हुआ आपका पुत्र शुक्र चन्द्रमा की किरणों के सम्बन्ध से औषधियों में प्रवेशकर अन्न
आदि के रूप से जन्मपरम्परा को पाकर समंगा के तट पर तपस्वी बनकर बैठा है