Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 13, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 13, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
श्रीवाल्मीकिरुवाच ।
इत्युक्तवत्यथ मुनौ दिवसो जगाम सायतनाय विधयेऽस्तमिनो जगाम ।
स्नातुं सभा कृतनमस्करणा जगाम श्यामाक्षये रविकरैश्च सहाजगाम ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवाल्मीकिजी ने कहा : श्रीमुनिजी के इतना कह चुकने पर
दिवस बीत गया, सूर्य भगवान अस्ताचल को चले गये, ऋषियों की सभा महामुनि को नमस्कार करके
सायंकालकी सन्ध्याविधि आदि के लिए स्नानार्थ चली गई । दूसरे दिन रात बीतने पर सूर्य के उदय होने
के साथ फिर आ गई