Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 13, Verse 17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 13, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
इत्युक्त्वा भगवान्कालो हसन्निव जगद्गतिम् ।
हस्ताद्धस्तेन जग्राह भृगुमिन्दुमिवांशुमान् ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
यह कहकर जगत की स्थिति पर हंस रहे भगवान काल ने हाथ
फैलाकर अपने हाथ से भृगुजी को ऐसे पकड़ा, जैसे सूर्य चन्द्रमा को पकड़े