Guru's AddaGuru's Adda

Utpatti Prakarana (Creation) · Sarga 63

बासठवाँ सर्ग समाप्त तविरसठवाँ सर्ग ब्रह्म मायाशक्ति के विलास से जिस प्रकार सर्वस्वरूप से ओर सर्वतः स्फुरित होता है उसका प्रतिपादन ।

9 verse-groups

  1. Verse 1“नित्यादिविलासैब्रह्मिव विस्फूर्जीति” ऐसा जो कहा, सो किसके कारण ? इस शंका पर कहते हैं। श्…
  2. Verse 2दूरत्व ओर तटस्थता का वारण करने के लिए (सर्वगम्‌ सर्वम्‌“ ये दो विशेषण हैं । यदि कोई शंका…
  3. Verse 3विभिन्न स्थानों में उसके विभिन्नरूपसे प्रकट होने में उसकी सत्यसंकल्पता ही कारण है, ऐसा कह…
  4. Verses 4–6शक्तियो के आर्विभाव के अनुरूप ही इसकी विचित्ररूप से स्थिति है, ऐसा कहते हैं। सर्वशक्तिमान…
  5. Verse 7जैसे सागर में छोटी-बड़ी तरंग और जल का, कंकण, बाजूबन्द से सोने का और अवयव तथा अवयवी का परस…
  6. Verse 8क्योंकि रज्जु आदि पदार्थ जिस प्रकार से यानी सर्प के आकार से प्रतीत होता है, वह उसी प्रकार…
  7. Verse 9सर्वसाधारण को प्रकाशित करनेवाला साक्षिचैतन्य भोक्ता के अदृष्ट से उद्बुद्ध होकर कहींपर कुछ…
  8. Verse 10यदि परमार्थदुष्टि से देखा जाय, तो यह विस्तृत प्रपंच ब्रह्म ही है। किन्तु मिथ्याज्ञानवाले…
  9. Verse 11इस प्रकार मिथ्याज्ञान से उपहित चिति, चाहे शास्त्रानुकूल हो, चाहे शास्त्र-विरुद्ध, जिसका क…